‘आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है, क्या है तुम्हारे पास?’
‘मेरे पास… मां है.’
फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के बीच का ये डायलॉग एक आइकॉन बन चुका है. इस पर न जाने कितने मीम्स बन चुके हैं. लेकिन इस डायलॉग के साथ मन में जो छवि उभरती है, वो कांस्टेंट है. छवि है एक बुढाती औरत की. एक दर्द की मारी बिचारी.
वो औरत जो करोड़ों लोगों के लिए फ़िल्मी मां का पर्याय बन गई. रीमा लागू, राखी, और किरन खेर से पहले बॉलीवुड की मां- निरूपा रॉय.
लेकिन वो सिर्फ मां ही नहीं थीं. उससे परे भी बहुत कुछ थीं. उनके बारे में कई बातें लोग अभी भी नहीं जानते. जैसे,
1.उनका असली नाम कोकिला किशोरचंद्र बलसारा था. गुजराती थीं. 4 जनवरी 1931 को वलसाड में जन्मी थीं. ये जगह तब बॉम्बे प्रेसिडेंसी में आती थी, आज गुजरात में है.
2.15 साल की उम्र में शादी हो गई. दो बच्चे हुए. पति के साथ बॉम्बे चली आईं. पति का नाम कमल रॉय. बच्चों का योगेश और किरन.
3.पहली हिंदी फिल्म का नाम था अमर राज. हीरो थे त्रिलोक कपूर. इनके साथ 18 फिल्में कीं.
4.1950 में आई त्रिलोक कपूर और निरूपा रॉय की फिल्म हर हर महादेव ने इन्हें बेहद पॉपुलर बना दिया. शिव-पार्वती के रूप में इनकी ये जोड़ी लोगों को बेहद पसंद आई. इतनी पसंद आई कि ये लोग कहीं दिख जाते तो लोग इनके पैरों में पड़कर आशीर्वाद मांगने लगते थे.
5,बिमल रॉय की क्लासिक फिल्म ‘दो बीघा ज़मीन’ से निरूपा रॉय सामाजिक सिनेमा की तरफ झुकीं, और ये जोड़ी टूट गई.
6.भारत भूषन, अशोक कुमार, बलराज साहनी इनके साथ काम करने वाले कुछ और एक्टर्स रहे. लेकिन उनकी पहचान बनी तो 70 के दशक में मां के रोल्स करने की वजह से. अमिताभ बच्चन की मां के रोल इतने निभाए उन्होंने कि लोगों के मन में उनकी वही बिचारी बूढ़ी मां वाली इमेज छप कर रह गई.
2004 में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ. उनके पति कमल रॉय भी 2015 में चल बसे. उनके गुजरने के बाद उनके दोनों बेटों में दरार आ गई. साल 1963 में मालाबार हिल्स में निरूपा रॉय ने एक प्रॉपर्टी खरीदी थी. तकरीबन दस लाख रुपए देकर. एम्बसी अपार्टमेंट्स में. चार बेडरूम्स का घर है. दो-दो बेडरूम दोनों बेटों के पास हैं. उसे लेकर झगड़े की खबरें आती रहती हैं. निजी जिंदगी में निरूपा रॉय की अब यही याद बची है. प्रॉपर्टी के नाम पर आपस में झगड़ते दो बेटे.
Source- Odd Naari