– ऐसे कपड़े पहनें, जिनमें आसानी से ब्रेस्टफीडिंग कराई जा सके, जैसे सामने से खुलनेवाली कुर्ती या स्ट्रेचवाली टीशर्ट पहनें, जिन्हें आसानी से उठाकर स्तनपान कराया जा सके.
– कई मांएं ब्रेस्टफीडिंग के बाद ब्रा नहीं पहनतीं, क्योंकि फीड कराने में द़िक्क़त होती है, पर ऐसा न करें. इससे ब्रेस्ट ढीले और बेडौल हो सकते हैं. सही साइज़ की ब्रा पहनें. ब्रेस्टफीडिंग कराने के लिए कई तरह की नर्सिंग ब्रा भी मार्केट में मिलती हैं.
– कई बार स्तनों से दूध टपकता रहता है, ऐसी स्थिति से निपटने के लिए डिसपोज़ेबल और वॉशेबल ब्रेस्ट पैड का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.
– एक स्कार्फ या दुपट्टा भी साथ रखें, ताकि दूध पिलाते व़क्त स्तन और बच्चे को ढंक सकें, पर ध्यान रखें कि शिशु आराम से सांस ले पाए.
– घर पर अपना एक नर्सिंग स्टेशन बनाएं, यानी एक ऐसी जगह तय करें, जहां आराम से बैठकर आप शिशु को दूध पिला पाएं.
– इस जगह पर पानी की बोतल, टीवी का रिमोट, बेबी वाइप्स, टिश्यूज़, शिशु के एक जोड़ी कपड़े और कुछ पसंदीदा क़िताबें लेकर बैठें, क्योंकि दूध पिलाने में कम से कम 40 मिनट का व़क्त तो लग ही जाता है, ऐसे में किसी चीज़ के लिए आपको बीच में उठना न पड़े.
– हर बार हाथ धोकर आराम से बैठें.
– हर बार दूध पिलाने से पहले अपने स्तनों को कपड़े या वेट टिश्यू पेपर से पोंछकर साफ़ कर लें.
– तकिए को पीठ के पीछे रखकर आराम से बैठ जाएं.
– यूं तो कई अलग-अलग पोज़िशन्स हैं ब्रेस्टफीडिंग कराने की, लेकिन वही तरीक़ा अपनाएं, जिसमें आप और बच्चा दोनों ही आराम महसूस करें.
– गोद में एक और तकिया रखें. तकिया इतना ऊंचा हो कि बच्चे को उस पर लिटाया जाए, तो उसका मुख मां के स्तन के क़रीब हो, इससे शिशु को दूध पीने में आसानी होती है और मां को ज़्यादा झुकना भी नहीं पड़ता.
– बच्चे के सिर, गला, पीठ को अपने हाथों से सहारा देकर रखें. शिशु को अपने नज़दीक ले आएं, ताकि वो आसानी से दूध पी सके.
– कोशिश करें कि बच्चे के मुख में एरोओला (निप्पल के आसपास के गहरे रंग की त्वचा) का भाग भी जाए, इससे शिशु को दूध खींचने में आसानी होगी.
– ध्यान रखें कि शिशु की नाक न दबे और वह आसानी से सांस ले पाए.
– दूध पिलाने के बाद शिशु को गोद में कंधे से चिपकाकर डकार ज़रूर दिलाएं, ताकि शिशु के पेट में गैस न बने.
सी-सेक्शन के बाद ब्रेस्टफीडिंग
– डिलीवरी अगर सी-सेक्शन या सर्जरी के ज़रिए हुई हो, तो ब्रेस्टफीडिंग डिलीवरी के तुरंत बाद करना थोड़ा मुश्किल होता है.
– ऑपरेशन के दर्द की वजह से बैठकर फीड कराना आसान नहीं होता.
– एनिस्थीसिया के असर की वजह से पांच से छह घंटे बाद ही नर्स और घर के सदस्यों की मदद से बच्चे को दूध पिलाना शुरू किया जा सकता है.
– शिशु को दूध पिलाने के लिए अस्पताल में मौजूद नर्स और डॉक्टर की सहायता अवश्य लें.
– सर्जरी के बाद मां को दी जानेवाली एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर्स का बहुत ज़्यादा असर मां के दूध पर नहीं होता, इसलिए चिंता न करें.
– बहुत ज़्यादा दर्द न हो, तो पेनकिलर अवॉइड करें.
Source – Meri Saheli